दिसंबर में SIP में ऐतिहासिक निवेश, म्यूचुअल फंड निवेश में नरमी

दिसंबर महीने के म्यूचुअल फंड आंकड़े निवेश के बदलते रुझानों को साफ तौर पर दिखाते हैं। इस दौरान SIP के माध्यम से निवेश ₹31,002 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा मासिक आंकड़ा माना जा रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब बाजार में उतार चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं की चर्चा बनी हुई है। इसके बावजूद SIP में लगातार बढ़ता निवेश यह संकेत देता है कि रिटेल निवेशक अनुशासित और दीर्घकालिक निवेश रणनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं।

SIP निवेश की खासियत यह है कि इसमें निवेशक हर महीने तय राशि का निवेश करता है। इससे बाजार के उतार चढ़ाव का असर औसत हो जाता है और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना बनती है। दिसंबर के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में निवेशक इस तरीके को अपनाए हुए हैं और बाजार की अस्थिरता के बावजूद निवेश जारी रखे हुए हैं।

हालांकि SIP ने रिकॉर्ड बनाया, लेकिन इक्विटी म्यूचुअल फंड में कुल शुद्ध निवेश नवंबर की तुलना में कुछ कम रहा। दिसंबर में इक्विटी फंड्स में निवेश लगभग ₹28,000 करोड़ के आसपास रहा, जो पिछले महीने से कम था। विशेषज्ञों के अनुसार इसका एक कारण यह हो सकता है कि कुछ निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की, जबकि कुछ ने नए निवेश को लेकर सतर्क रुख अपनाया।

इक्विटी फंड की विभिन्न श्रेणियों में निवेश का रुझान समान नहीं रहा। फ्लेक्सी कैप और मल्टी कैप फंड्स में निवेशकों की रुचि बनी रही, क्योंकि इनमें फंड मैनेजर को अलग अलग बाजार परिस्थितियों में निवेश की छूट होती है। वहीं टैक्स बचत से जुड़ी कुछ योजनाओं और चुनिंदा सेक्टर फंड्स में निकासी का दबाव देखा गया।

दिसंबर में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा असर डेट फंड्स से हुई भारी निकासी का पड़ा। इस महीने डेट म्यूचुअल फंड से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी दर्ज की गई। इसका सीधा असर इंडस्ट्री के कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM पर पड़ा और इसमें हल्की गिरावट देखने को मिली। माना जा रहा है कि तिमाही समाप्ति, कॉरपोरेट संस्थाओं की नकदी जरूरतें और ब्याज दरों से जुड़ी रणनीतियां इस निकासी के प्रमुख कारण रहे।

डेट फंड से निकासी के बावजूद कुछ सुरक्षित और वैकल्पिक निवेश विकल्पों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। गोल्ड ETF में निवेश देखने को मिला, जो यह दर्शाता है कि निवेशक जोखिम को संतुलित करने के लिए अपने पोर्टफोलियो में विविधता बना रहे हैं। इसके अलावा हाइब्रिड और मल्टी एसेट फंड्स में भी निवेश का रुझान सकारात्मक रहा, क्योंकि ये योजनाएं इक्विटी और डेट दोनों का संतुलन प्रदान करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि SIP निवेश में लगातार बढ़ोतरी भारतीय निवेशकों की सोच में आए बदलाव को दर्शाती है। अब निवेशक अल्पकालिक उतार चढ़ाव की बजाय लंबे समय के लक्ष्यों पर ध्यान दे रहे हैं। नियमित निवेश की यह आदत भविष्य में पूंजी निर्माण के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।

दिसंबर के आंकड़े यह भी बताते हैं कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री एक संक्रमण के दौर से गुजर रही है। एक तरफ SIP के जरिए स्थिर और मजबूत निवेश प्रवाह बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कुछ श्रेणियों में अस्थायी दबाव दिखाई दे रहा है। यह स्थिति बाजार के परिपक्व होने और निवेशकों के ज्यादा समझदार फैसले लेने का संकेत भी मानी जा रही है।

दिसंबर 2026 का महीना म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए मिश्रित तस्वीर लेकर आया। SIP निवेश ने जहां नया रिकॉर्ड बनाया, वहीं डेट फंड से भारी निकासी और कुल AUM में हल्की गिरावट ने संतुलन का संकेत दिया। यह रुझान बताता है कि निवेशक अब सोच समझकर और लक्ष्य आधारित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें अनुशासन और लंबी अवधि की योजना को प्राथमिकता दी जा रही है।

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न्यूज़ डेस्क

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