
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान आज आधिकारिक भारत दौरे पर पहुंच रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में कूटनीतिक और रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा है, जबकि पिछले एक दशक में वह पांचवीं बार भारत आ रहे हैं। इस दौरे को भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच गहरी होती रणनीतिक साझेदारी की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और यूएई राष्ट्रपति के बीच होने वाली बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की संभावना है। सरकार और कूटनीतिक हलकों में इस दौरे को केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक संतुलन के बीच एक अहम संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले दौरे और बढ़ता भरोसा
भारत और यूएई के रिश्ते बीते कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़े हैं। उच्चस्तरीय दौरों की निरंतरता ने दोनों देशों के बीच भरोसे को मजबूत किया है। सितंबर 2024 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद भारत आए थे, जबकि अप्रैल 2025 में दुबई के क्राउन प्रिंस और यूएई के रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने भारत का दौरा किया। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिसंबर 2025 में अबू धाबी जाकर 16वीं भारत यूएई संयुक्त आयोग बैठक और पांचवें रणनीतिक संवाद की सह अध्यक्षता की थी। प्रधानमंत्री मोदी स्वयं 2023 के अंत और 2024 के दौरान कई बार यूएई गए, जिनमें फरवरी 2024 की यात्रा खास रही, जब उन्होंने अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया। जून 2024 में इटली में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इन लगातार संपर्कों ने यह संकेत दिया कि भारत और यूएई के रिश्ते अब केवल औपचारिक साझेदारी तक सीमित नहीं रहे।
भारत यूएई रिश्तों की आर्थिक और रणनीतिक धुरी
भारत और यूएई के संबंध राजनीतिक समझ, सांस्कृतिक जुड़ाव और मजबूत आर्थिक सहयोग पर टिके हैं। यूएई भारत के सबसे बड़े व्यापार और निवेश साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता, लोकल करेंसी सेटलमेंट सिस्टम और द्विपक्षीय निवेश संधि जैसे कदमों ने व्यापार को नई रफ्तार दी है। ऊर्जा क्षेत्र में यूएई भारत की ऊर्जा सुरक्षा का अहम स्तंभ है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति से लेकर रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व तक, दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग मौजूद है। इस दौरे के दौरान इन सभी पहलों की प्रगति की समीक्षा होने की उम्मीद है, साथ ही नए क्षेत्रों में सहयोग के रास्ते तलाशे जा सकते हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी चर्चा का अहम हिस्सा रह सकता है, खासकर समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता जैसे मुद्दों पर।
गल्फ की बदलती राजनीति और पाकिस्तान सऊदी फैक्टर
यूएई राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब गल्फ क्षेत्र में नए गुट उभरते दिख रहे हैं। एक ओर सऊदी अरब का झुकाव हाल के समय में पाकिस्तान की ओर बढ़ा है, तो दूसरी ओर यूएई ने भारत के साथ प्रगतिशील और आर्थिक विकास आधारित साझेदारी को प्राथमिकता दी है। सऊदी अरब ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है, जिसमें पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को एक कारक के रूप में देखा जा रहा है। वहीं यूएई की रणनीति इससे अलग नजर आती है। यूएई भारत को एक स्थिर, विशाल बाजार और भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में देखता है। कूटनीतिक जानकार मानते हैं कि यूएई के लिए भारत के साथ रिश्ते मजबूत करना केवल आर्थिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश है। यह दौरा उस संदेश को और स्पष्ट करता है कि भारत के साथ दोस्ती को अब क्षेत्रीय राजनीति में एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
मोदी MBZ मुलाकात से निकलने वाले वैश्विक संकेत
प्रधानमंत्री मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद की मुलाकात केवल द्विपक्षीय एजेंडे तक सीमित नहीं रहने वाली है। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर दोनों नेताओं के विचारों का मिलना इस बैठक को खास बनाता है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए यूएई की भूमिका और अहम हो जाती है। इसके अलावा भारत मिडिल ईस्ट यूरोप कॉरिडोर जैसी पहलें भी चर्चा में आ सकती हैं, जो क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार के नए रास्ते खोलने की क्षमता रखती हैं। गल्फ में बढ़ते अस्थिरता के संकेतों के बीच यूएई का भारत के करीब आना यह दर्शाता है कि भविष्य की साझेदारी आर्थिक मजबूती और स्थिरता पर आधारित होगी। जब शेख मोहम्मद बिन जायद भारत की धरती पर कदम रखेंगे, तो यह केवल एक राजकीय यात्रा नहीं होगी, बल्कि बदलते मिडिल ईस्ट और भारत के बढ़ते वैश्विक कद का प्रतीक भी मानी जाएगी।




