केंद्र सरकार ने बजट 2026 से पहले सभी प्रमुख केंद्रीय योजनाओं की व्यापक समीक्षा करने का फैसला किया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी खर्च को अधिक प्रभावी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ सही पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार कई योजनाएं वर्षों से चल रही हैं, लेकिन उनमें से कुछ का जमीनी प्रभाव अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है, जिस कारण सरकार अब एक व्यवस्थित मूल्यांकन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

सरकार की इस समीक्षा प्रक्रिया में उन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जिनमें एक जैसी प्रकृति की सुविधाएं दी जा रही हैं या जिनके उद्देश्य आपस में मिलते जुलते हैं। ऐसे मामलों में योजनाओं को आपस में मर्ज करने या उनके ढांचे में बदलाव करने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल प्रशासनिक बोझ कम होगा, बल्कि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव हो पाएगा।
बजट से पहले होने वाली इस समीक्षा का एक अहम उद्देश्य यह भी है कि सरकारी योजनाओं में होने वाले खर्च और उनके वास्तविक परिणामों के बीच के अंतर को समझा जा सके। कई बार ऐसा देखा गया है कि योजनाओं के लिए बड़ी राशि आवंटित की जाती है, लेकिन अंतिम स्तर पर लाभ सीमित लोगों तक ही पहुंच पाता है। सरकार अब डेटा और फीडबैक के आधार पर यह जानना चाहती है कि कौन सी योजनाएं वास्तव में लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं।
वित्त मंत्रालय ने सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी-अपनी योजनाओं का विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करें। इन रिपोर्टों में योजना के उद्देश्य, लाभार्थियों की संख्या, खर्च की गई राशि और अब तक के प्रभाव का स्पष्ट विवरण शामिल होगा। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन योजनाओं को जारी रखा जाए, किनमें संशोधन किया जाए और किन योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाए।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया किसी भी योजना को अचानक समाप्त करने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य योजनाओं को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाना है। सरकार यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीब कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि इन क्षेत्रों में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बजट 2026 की तैयारी के संदर्भ में यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आने वाले वर्षों में सरकार को वित्तीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं में अनावश्यक दोहराव को समाप्त किया जाए, तो सरकार बड़ी बचत कर सकती है और उस धन का उपयोग नए विकास कार्यों में किया जा सकता है।
इस प्रक्रिया का असर आम जनता पर भी पड़ेगा। कई योजनाओं के नियमों और पात्रता मानदंडों में बदलाव संभव है। कुछ योजनाओं में डिजिटल प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जा सकता है, ताकि लाभ वितरण में पारदर्शिता बनी रहे। सरकार पहले से ही यह संकेत दे चुकी है कि भविष्य की योजनाएं अधिक तकनीक आधारित और डेटा संचालित होंगी।
ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, रोजगार और कृषि से जुड़ी योजनाओं की भी विशेष समीक्षा की जा रही है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में योजनाएं संचालित हो रही हैं और सरकार चाहती है कि इनका वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। इसके लिए राज्य सरकारों से भी फीडबैक लिया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर की स्थिति को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम लंबे समय में सरकारी नीतियों को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बना सकता है। जब योजनाओं की संख्या सीमित और स्पष्ट होगी, तो उनके क्रियान्वयन पर निगरानी रखना भी आसान होगा। इससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की संभावना को भी कम किया जा सकता है।
हालांकि, कुछ सामाजिक संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि समीक्षा प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी योजना का लाभ अचानक बंद न हो। सरकार को इस बात का ध्यान रखना होगा कि बदलाव धीरे-धीरे लागू किए जाएं ताकि लाभार्थियों को समय पर जानकारी मिल सके और वे नए नियमों के अनुसार खुद को तैयार कर सकें।
कुल मिलाकर, बजट 2026 से पहले सरकारी योजनाओं की यह व्यापक समीक्षा आने वाले समय में नीति निर्धारण की दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि यह प्रक्रिया संतुलित और पारदर्शी तरीके से लागू की जाती है, तो इससे सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार होगा और आम नागरिकों का भरोसा भी मजबूत होगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार किन योजनाओं को नई दिशा देने जा रही है और किन क्षेत्रों में नए प्रयास किए जाएंगे।




