भारत का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कलपक्कम में क्रिटिकलिटी तक पहुंचा

भारत ने अपनी परमाणु ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अब सफलतापूर्वक “क्रिटिकलिटी” अवस्था में पहुंच गया है. इसका मतलब है कि इसमें नियंत्रित और स्वयं चलने वाली परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हो चुकी है.

यह रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है और इसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है. यह उपलब्धि दशकों की वैज्ञानिक मेहनत और इंजीनियरिंग क्षमता का परिणाम मानी जा रही है.

क्या है फास्ट ब्रीडर रिएक्टर

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर सामान्य परमाणु रिएक्टर से अलग होता है. यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है उससे ज्यादा नया ईंधन पैदा भी करता है. इसमें यूरेनियम और प्लूटोनियम आधारित मिश्रित ईंधन का उपयोग होता है और आसपास की परत में मौजूद यूरेनियम को नए फिशाइल ईंधन में बदला जाता है. यही कारण है कि इसे “ब्रीडर” कहा जाता है यानी यह खुद अपना ईंधन भी तैयार करता है.

असली तकनीक क्या है. थोरियम या यूरेनियम प्लूटोनियम

कलपक्कम का यह रिएक्टर मुख्य रूप से यूरेनियम और प्लूटोनियम आधारित मिश्रित ऑक्साइड ईंधन पर चलता है जिसे MOX फ्यूल कहा जाता है.

इसका कोर निम्न प्रकार काम करता है.

• मुख्य ईंधन. प्लूटोनियम 239 और यूरेनियम 238 का मिश्रण
• फ्यूल टाइप. MOX यानी Mixed Oxide fuel
• न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रम. फास्ट न्यूट्रॉन
• कूलेंट. तरल सोडियम
• क्षमता. 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक

यह रिएक्टर पारंपरिक रिएक्टर की तरह केवल ईंधन जलाता नहीं है बल्कि नया ईंधन बनाता भी है.

ब्रीडिंग कैसे होती है

इस रिएक्टर के चारों ओर एक “ब्लैंकेट” लेयर होती है.

• यह परत यूरेनियम 238 से बनी होती है
• न्यूट्रॉन इसको बदलकर नया प्लूटोनियम बनाते हैं
• इसी वजह से इसे “ब्रीडर” कहा जाता है

आगे के चरण में इस ब्लैंकेट में थोरियम 232 भी इस्तेमाल किया जाएगा. इससे यूरेनियम 233 बनेगा जो भविष्य के रिएक्टर का ईंधन होगा.

क्या यह थोरियम रिएक्टर है

सीधा जवाब है नहीं.

अभी यह प्लूटोनियम आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है लेकिन इसका उद्देश्य थोरियम को उपयोगी ईंधन में बदलना है इसलिए यह “थोरियम अर्थव्यवस्था” की तैयारी है.

भारत का पूरा मॉडल इस प्रकार है

• पहला चरण. प्राकृतिक यूरेनियम रिएक्टर
• दूसरा चरण. प्लूटोनियम आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर
• तीसरा चरण. थोरियम आधारित यूरेनियम 233 रिएक्टर

तकनीकी डिजाइन की गहराई

यह रिएक्टर साधारण नहीं बल्कि अत्यंत उन्नत डिजाइन पर आधारित है.

• प्रकार. सोडियम कूल्ड फास्ट रिएक्टर
• थर्मल पावर. लगभग 1250 मेगावाट
• क्लोज्ड फ्यूल साइकिल. इस्तेमाल किया गया ईंधन दोबारा प्रोसेस होता है
• उच्च तापमान पर संचालन. अधिक दक्षता

सोडियम का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि यह पानी की तरह न्यूट्रॉन को धीमा नहीं करता और फास्ट रिएक्टर को संभव बनाता है.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण

यह उपलब्धि भारत के तीन चरण वाले परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश का संकेत देती है. इस कार्यक्रम की परिकल्पना होमी भाभा ने की थी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत अपने सीमित यूरेनियम संसाधनों के बावजूद लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा हासिल कर सकता है. अनुमान है कि इस तकनीक से सैकड़ों वर्षों तक बिजली उत्पादन संभव हो सकता है.

थोरियम की दिशा में बड़ा कदम

भारत दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है. यह रिएक्टर भविष्य में थोरियम से यूरेनियम 233 बनाने का मार्ग खोलता है. यही भारत के तीसरे चरण का आधार बनेगा. इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक है. पूर्ण रूप से चालू होने पर भारत रूस के बाद ऐसा करने वाला दूसरा देश बन सकता है.

आगे क्या

अभी यह रिएक्टर परीक्षण और चरणबद्ध संचालन में रहेगा. इसके बाद इसे पूरी क्षमता पर बिजली उत्पादन के लिए ग्रिड से जोड़ा जाएगा. यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य और 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

कलपक्कम का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है. यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक क्षमता और भविष्य की स्थायी ऊर्जा रणनीति का मजबूत आधार है. आने वाले वर्षों में यही तकनीक भारत को थोरियम आधारित ऊर्जा युग की ओर ले जा सकती है.

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Mahak Kushwaha
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