
ताज़ा अपडेट: मिशन असफल रहा.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO आज 12 जनवरी 2026 को अपने प्रतिष्ठित Polar Satellite Launch Vehicle DL रॉकेट के माध्यम से PSLV C62 EOS N1 मिशन लॉन्च करने जा रहा है। यह मिशन 2026 की पहली अंतरिक्ष उड़ान के रूप में निर्धारित है और इसका प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा से किया जाएगा। मिशन का मुख्य उद्देश्य EOS N1 नामक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को कक्षा में स्थापित करना है। इस मिशन का आयोजन NewSpace India Limited के तहत राष्ट्रीय और वाणिज्यिक उपयोग दोनों के लिए किया जा रहा है।
EOS N1 अन्वेषा उपग्रह से पृथ्वी निगरानी को नई क्षमता
PSLV C62 मिशन का मुख्य पेलोड EOS N1 उपग्रह है जिसे अन्वेषा नाम दिया गया है। यह उपग्रह Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित किया गया एक हाइपरस्पेक्ट्रल पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। अन्वेषा को उच्च रेजोल्यूशन इमेजिंग क्षमताओं के साथ डिजाइन किया गया है जिससे भूमि उपयोग कृषि गतिविधियों पर्यावरणीय बदलाव और रक्षा से जुड़ी निगरानी को बेहतर बनाया जा सके। उपग्रह में लगे हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर कई स्पेक्ट्रल बैंड्स में डेटा कैप्चर करने में सक्षम हैं जो पारंपरिक कैमरों की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं।
रणनीतिक और रक्षा दृष्टि से अहम मिशन
EOS N1 उपग्रह का उद्देश्य भारत की रक्षा निगरानी क्षमता को मजबूत करना है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस उपग्रह से सीमा क्षेत्रों में गतिविधियों की निगरानी और विश्लेषण संभव होगा। इससे वास्तविक समय में सूचनाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी जो रणनीतिक निर्णय प्रक्रिया में सहायक होंगी। इसके साथ ही यह उपग्रह पर्यावरण निगरानी आपदा प्रबंधन और नागरिक उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा जिससे इसके बहुआयामी उपयोग सुनिश्चित होते हैं।
PSLV C62 रॉकेट की तकनीकी संरचना
PSLV C62 रॉकेट ISRO का एक भरोसेमंद प्रक्षेपण वाहन है जिसे पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों को Sun Synchronous Orbit में स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है। PSLV DL कॉन्फिगरेशन में यह चार चरणों वाला रॉकेट है जिसमें ठोस और तरल ईंधन आधारित चरण शामिल हैं। इसमें दो सॉलिड स्ट्रैप ऑन बूस्टर्स लगाए गए हैं जो प्रक्षेपण के समय अतिरिक्त शक्ति प्रदान करते हैं। PSLV की यह संरचना पिछले कई वर्षों से लगातार सफल अभियानों में उपयोग की जा रही है।
सह यात्री उपग्रह और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
PSLV C62 EOS N1 मिशन के तहत मुख्य उपग्रह के साथ 15 से 18 छोटे सह यात्री उपग्रह भी लॉन्च किए जाएंगे। इनमें भारत के स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों द्वारा विकसित CubeSats और अन्य लघु उपग्रह शामिल हैं। कुछ सह यात्री उपग्रहों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इमेजिंग पेलोड भी लगाए गए हैं। यह मिशन NSIL के वाणिज्यिक कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत भारत वैश्विक ग्राहकों को लॉन्च सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
लॉन्च की तैयारी और कार्यक्रम
ISRO और NSIL के अनुसार PSLV C62 मिशन के लिए रॉकेट और सभी पेलोड का समेकन पूरा कर लिया गया है। प्री लॉन्च जांच और तकनीकी परीक्षण जारी हैं। यह मिशन 12 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजकर 17 मिनट IST के आसपास प्रथम लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया जाएगा। इस लॉन्च के साथ ISRO वर्ष 2026 के अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत करेगा और PSLV की तकनीकी विश्वसनीयता को एक बार फिर प्रदर्शित किया जाएगा।
वैश्विक और वैज्ञानिक महत्व
PSLV C62 EOS N1 मिशन भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति को दर्शाता है। यह मिशन न केवल राष्ट्रीय रक्षा और पर्यावरणीय निगरानी को मजबूती देगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा। EOS N1 जैसे उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय और डेटा उपयोगकर्ताओं के लिए नई संभावनाएं खोलने में सहायक सिद्ध होंगे।
UPDATE: MISSION UNSUCCESSFUL




