
भारत सरकार ने स्मार्टफोन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए टेलीकोम सिक्योरिटी एश्योरेंस रिक्वायरमेंट्स नामक एक नया सेट सुरक्षा मानक प्रस्तावित किया है, जिसमें स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों से उनके डिवाइस का
सोर्स कोड साझा करने की आवश्यकता शामिल है, ताकि सुरक्षा कमजोरियों का पता लगाया जा सके और उपयोगकर्ता डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस प्रस्ताव के तहत मोबाइल कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर अपडेट और सुरक्षा पैच के बारे में सरकार को पहले से सूचित करना होगा तथा उपकरणों में संभावित खतरे जैसे कि अनधिकृत कैमरा या माइक्रोफोन उपयोग को रोकने के उपाय शामिल होंगे। प्रस्ताव का लक्ष्य भारत में उपयोग किए जा रहे लगभग 75 करोड़ स्मार्टफोनों के साइबर सुरक्षा जोखिम को कम करना है।
प्रस्तावित नियमों में कुल मिलाकर 83 सुरक्षा मानकों का उल्लेख है जो कंपनियों को पूरा करना होगा। इन मानकों में यह भी शामिल है कि पहले से इंस्टॉल किए गए ऐप्स को हटाने की सुविधा देनी चाहिए और नियमित रूप से डिवाइस में मैलवेयर स्कैनिंग होनी चाहिए। सरकार का तर्क है कि बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा लीक मामलों के कारण यह कदम आवश्यक है ताकि उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके तहत सॉफ्टवेयर की जांच के लिए भारत स्थित सरकारी लैबों को सोर्स कोड प्रदान किया जाएगा, जिससे संभावित जोखिमों की पहचान और समाधान किया जा सके।
टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया और विरोध
मोबाइल फोन निर्माता बड़े तकनीकी ब्रांड जैसे Apple, Samsung, Google और Xiaomi ने इस प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया है। इन कंपनियों का कहना है कि सोर्स कोड उनके लिए सबसे संवेदनशील बौद्धिक संपदा है और इसे साझा करना उनके व्यवसाय और सुरक्षा के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकता है। कंपनियों ने तर्क दिया है कि दुनिया में कहीं भी इस तरह की कोई समान आवश्यकता नहीं है और इससे उनके प्राइवेट टेक्नोलॉजी और प्रतिस्पर्धात्मक जानकारी के सार्वजनिक होने का खतरा है।
टेक कंपनियों ने यह भी कहा है कि लगातार मैलवेयर स्कैनिंग जैसे उपाय डिवाइस की बैटरी लाइफ पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं और हर अपडेट के लिए सरकारी मंजूरी लेने की आवश्यकता व्यावहारिक चुनौतियाँ प्रस्तुत करेगी क्योंकि कई बार तात्कालिक सुरक्षा पैच जारी करना आवश्यक होता है। इंडस्ट्री बॉडी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) ने कहा है कि कुछ प्रस्तावित नियम वैश्विक मानकों के खिलाफ हैं और इससे गोपनीयता तथा प्राइवेसी पर प्रश्न उठते हैं।
सरकार की स्पष्टता और परामर्श प्रक्रिया
हालाँकि कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि सरकार स्मार्टफोन निर्माताओं से सोर्स कोड साझा करने की मांग कर रही है, सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभी एक परामर्शात्मक प्रक्रिया है और कोई अंतिम नियम अभी तक लागू नहीं किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने बताया है कि विभिन्न सुरक्षा पहलुओं पर स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत जारी है और यह एक मानकीकृत रूपरेखा तैयार करने का प्रयास है, न कि तुरंत लागू होने वाला कोई नियम।
सरकार के अनुसार यह परामर्श एक सामान्य और आवश्यक प्रक्रिया है, ताकि एक उपयुक्त स्मार्टफोन सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सके जिसमें सभी हितधारकों की चिंताओं पर विचार किया जाए। मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी है कि रिपोर्टों को आधिकारिक विचार के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए जब तक कि कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता। इस परामर्श का उद्देश्य एक संतुलित सुरक्षा ढांचे का निर्माण करना है जिसमें उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और उद्योग की उत्पादकता दोनों का ध्यान रखा जाए।
नियमों का संभावित प्रभाव और चर्चा
यदि ये नियम लागू होते हैं तो इससे स्मार्टफोन निर्माताओं और उपयोगकर्ताओं दोनों पर प्रभाव पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि इससे फोन की सुरक्षा और प्राइवेसी मजबूत होगी, लेकिन कंपनियों का तर्क है कि इससे उनकी तकनीकी गोपनीयता प्रभावित होगी और फोन प्रदर्शन तथा बैटरी लाइफ पर असर हो सकता है। बातचीत जारी है और अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।




