
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तेल को लेकर चल रहे एक घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा बाजार, दोनों का ध्यान खींचा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद वेनेजुएला का बहुत सा कच्चा तेल देश के भीतर ही फंसा है जिससे उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था पर और भी गहरा दबाव पड़ गया है। अब अमेरिकी सरकार की मध्यस्थता में उसी तेल की बिक्री की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस कदम को जहां कुछ लोग वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं, वहीं इसके कानूनी और राजनीतिक पहलुओं को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद वेनेजुएला के तेल की बिक्री की प्रक्रिया
अमेरिकी सरकार वेनेजुएला के उस कच्चे तेल की बिक्री में मध्यस्थता कर रही है, जो ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए आंशिक प्रतिबंधों के बाद देश में ही फंसा रह गया था। इस प्रक्रिया के तहत करोड़ों बैरल तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने की व्यवस्था की गई है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग इस पहल का समन्वय कर रहा है और अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती सौदे पहले ही पूरे हो चुके हैं। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लंबे समय से तेल निर्यात पर निर्भर रही है और प्रतिबंधों के कारण उसकी आय पर गहरा असर पड़ा था।
प्रतिबंधों के कारण तेल उद्योग पर पड़ा दबाव
ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए आंशिक तेल प्रतिबंधों के बाद वेनेजुएला के लिए कच्चे तेल का निर्यात लगभग रुक गया था। टैंकरों पर नाकेबंदी के चलते देश को अपनी सबसे बड़ी आय के स्रोत से हाथ धोना पड़ा। तेल की बिक्री बंद होने से विदेशी मुद्रा का प्रवाह थम गया और देश की सीमित तेल भंडारण क्षमता पर दबाव बढ़ने लगा। अधिकारियों का कहना है कि हालात ऐसे बन गए थे कि प्रमुख तेल उत्पादन क्षेत्रों को बंद करने की नौबत आ सकती थी, जिससे तेल क्षेत्रों को स्थायी नुकसान होने की आशंका थी। सरकार ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर यह स्थिति बनी रहती, तो जरूरी सामान के आयात और बुनियादी सेवाओं को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापारियों की भूमिका और बिक्री की व्यवस्था
निकोलेस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनियों से संपर्क किया। इसके तहत ट्रैफिगुरा और विटोल को वेनेजुएला के फंसे हुए तेल की बिक्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। इन कंपनियों ने तय मात्रा में तेल के लिए भुगतान कर दिया है और अब तक कई मिलियन बैरल तेल की शिपमेंट की जा चुकी है। यह तेल पहले कैरिबियन क्षेत्र के कुछ द्वीपों में स्थित भंडारण केंद्रों तक भेजा जा रहा है, जहां से आगे इसे अमेरिकी रिफाइनरियों तक ले जाने की योजना है। सूत्रों के मुताबिक वेनेजुएला को इस सौदे के तहत प्रति बैरल लगभग 50 डॉलर मिल रहे हैं।
सौदे की कानूनी स्थिति और उठते सवाल
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कानूनी आधार स्पष्ट नहीं है। अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि अमेरिकी प्रशासन किस कानूनी ढांचे के तहत वेनेजुएला के तेल की बिक्री में मध्यस्थता कर रहा है। कुछ अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी की कमी हो सकती है। वेनेजुएला के अर्थशास्त्री फ्रांसिस्को रोड्रिगेज ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि ऐसी स्थिति में बोली और अनुबंध प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं व्हाइट हाउस ने इस सौदे को ऐतिहासिक बताया है और दावा किया है कि इससे अमेरिका और वेनेजुएला दोनों को लाभ होगा। इस बीच सौदे की कुल कीमत को लेकर भी भ्रम की स्थिति सामने आई, जिसे बाद में तेल उद्योग से जुड़े लोगों ने स्पष्ट किया।
तेल बिक्री से अर्थव्यवस्था में दिखते शुरुआती संकेत
तेल की बिक्री शुरू होने के बाद वेनेजुएला की मुद्रा और वित्तीय बाजारों में कुछ स्थिरता के संकेत देखे जा रहे हैं। तेल से मिलने वाली आय ने डॉलर की कमी से पैदा हुई अनिश्चितता को कुछ हद तक कम किया है। अमेरिकी और वेनेजुएला के अधिकारी अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि एस्क्रो खातों में रखी गई रकम को किस तरह सीधे अर्थव्यवस्था में प्रवाहित किया जाए। इसके लिए कुछ प्रतिबंधों में ढील देने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। केंद्रीय बैंक और निजी बैंकों के बीच बैठकों का सिलसिला जारी है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर तेल उत्पादन में बढ़ोतरी होती है, तो इससे आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल सकता है और आने वाले महीनों में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत और स्पष्ट हो सकते हैं।




