
खेती की बढ़ती लागत और श्रम संकट के बीच किसानों के लिए कृषि यंत्रों पर सब्सिडी को लेकर सरकार की ओर से राहत भरी पहल सामने आई है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित कृषि मशीनीकरण योजनाओं के तहत किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी की खरीद पर 40 से 50 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आधुनिक तकनीक की ओर ले जाना है ताकि उत्पादन क्षमता बढ़े और खेती की लागत पर नियंत्रण रखा जा सके। इस योजना का क्रियान्वयन मुख्य रूप से Sub-Mission on Agricultural Mechanization के दिशा निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है।
किसे कितना अनुदान, पात्रता के आधार पर तय होती है सब्सिडी
कृषि यंत्र सब्सिडी योजना में अनुदान की सीमा किसान की श्रेणी और सामाजिक स्थिति के आधार पर तय की जाती है। सामान्य श्रेणी के किसानों को कृषि मशीनों पर अधिकतम 40 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला किसान और छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए यह सहायता 50 प्रतिशत तक निर्धारित है। पात्रता के लिए किसान का राज्य कृषि विभाग में पंजीकरण होना आवश्यक है। इसके साथ ही वैध भूमि दस्तावेज और बैंक खाता अनिवार्य माना जाता है, ताकि सब्सिडी की राशि सीधे खाते में भेजी जा सके।
इन कृषि यंत्रों पर मिल रहा है अनुदान का लाभ
सरकार ने उन कृषि यंत्रों को प्राथमिकता दी है जिनसे खेती में समय और श्रम दोनों की बचत होती है। योजना के तहत सीड ड्रिल, रोटावेटर, मल्टी क्रॉप प्लांटर, जीरो टिल सीडर, स्प्रेयर, रीपर कम बाइंडर और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपयोग होने वाले हैप्पी सीडर जैसे यंत्र शामिल किए गए हैं। इन मशीनों के उपयोग से बुआई और कटाई समय पर हो पाती है, जिससे फसल नुकसान की संभावना कम होती है। कई राज्यों ने पराली प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विशेष यंत्रों को भी सब्सिडी सूची में शामिल किया है।
कैसे करें आवेदन, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन तय
कृषि यंत्र सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। सबसे पहले किसान को अपने राज्य के कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल या केंद्र सरकार के पोर्टल https://www.myscheme.gov.in/schemes/smam पर जाकर पंजीकरण करना होता है। पंजीकरण के बाद किसान अपनी व्यक्तिगत जानकारी, भूमि विवरण और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी भरता है। इसके बाद उपलब्ध सूची में से इच्छित कृषि यंत्र का चयन कर मशीन का कोटेशन अपलोड किया जाता है। आवेदन जमा होने के बाद कृषि विभाग द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। सत्यापन पूरा होने पर किसान मशीन खरीदता है और उसका बिल पोर्टल पर अपलोड करता है। इसके बाद सब्सिडी की राशि डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है।
खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने पर फोकस
कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का सीधा असर खेती की लागत और उत्पादन दोनों पर देखने को मिल रहा है। मशीनीकरण से समय पर कृषि कार्य पूरे हो पाते हैं, जिससे उत्पादन में स्थिरता आती है। श्रम पर निर्भरता घटने से मजदूरी खर्च कम होता है और किसान सीमित संसाधनों में अधिक क्षेत्र में खेती कर पाते हैं। इसके साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों के उपयोग से पर्यावरणीय समस्याओं में कमी आती है और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। सरकार का मानना है कि यह योजना किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
विश्वसनीय जानकारी के लिए आधिकारिक लिंक
https://www.myscheme.gov.in/schemes/smam
https://agrimachinery.nic.in
https://pmkisan.gov.in




