
नई दिल्ली/देहरादून
दिल्ली और देहरादून के बीच बनने वाला बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और फरवरी 2026 में आम वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा, जिससे दोनों शहरों के बीच का सफर अब महज 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. इस वजह से यात्रियों के लिए नई सड़क सुविधा, समय की बचत और व्यापार-पर्यटन दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, जिसे आधिकारिक रूप से दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर कहा जाता है, करीब 210-213 किलोमीटर लंबा है और इसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा विकसित किया गया है. इस एक्सप्रेसवे का प्रारंभ दिल्ली के अक्षरधाम के पास से होता है और यह बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड में देहरादून तक जाएगा. यह छह लेन का एक्सप्रेसवे है जिसमें कई एलिवेटेड सेक्शन और सुरंगें भी शामिल हैं.
टाइम-सेविंग कॉरिडोर, फरवरी में खुलने की तैयारी
निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और कुछ छोटे-मोटे फिनिशिंग कार्य शेष हैं, जिन्हें जल्द पूरा कर जून 2026 से पहले वाहन मार्ग खोलने के लिये तैयार किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार इस नए हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे के खुलने से दिल्ली से देहरादून का वर्तमान 6-7 घंटे का सफर घटकर करीब 2.5 घंटे रह जाएगा, जिससे खासकर उत्तर भारत के यात्रियों और व्यापारियों को बड़ा लाभ होगा.
ट्रायल रन पहले से ही कई हिस्सों पर सफलतापूर्वक हो चुके हैं और कुछ हिस्सों पर वाहनों का परिचालन पहले ही शुरू किया जा चुका है, जिससे कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा का परीक्षण किया गया है. एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजाओं, आराम करने की जगहों और आपातकालीन सेवाओं का इंतजाम भी किया जा रहा है जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.
आधुनिक सुविधाएं और रहन-सहन के इंतजाम
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर आधुनिक सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है. हर 30 किलोमीटर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन, रेस्ट एरिया, भोजन-पीने के आउटलेट आदि की व्यवस्था होगी ताकि लंबी यात्रा में आराम मिल सके. इसके अलावा एक्सप्रेसवे पर स्मार्ट पार्किंग हब विकसित किये जा रहे हैं जिनमें कैशलेस भुगतान, 24×7 सीसीटीवी निगरानी, डीजिटल जानकारी पैनल और शौचालय आदि सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
विशेषकर दिल्ली सेक्शन पर तीन हाई-टेक पार्किंग हब बनाए जाने की योजना है, जो अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर, ललिता पार्क और गीता कॉलोनी इलाके में स्थित होंगे. ये हब यात्रियों को पार्किंग की समस्या से राहत देंगे और ट्रैफिक मैनेजमेंट को भी बेहतर बनाएंगे.
पर्यावरण और जैव विविधता के लिए संवेदनशील डिजाइन
इस एक्सप्रेसवे का एक बड़ा हिस्सा संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरता है, जिसमें शिवालिक की पहाड़ियां और राजाजी नेशनल पार्क शामिल हैं. यहां वन्यजीवों के रास्ते में बाधा न आए, इसके लिए विशेष एनिमल कॉरिडोर, एलिवेटेड रोड सेक्शन, साउंड बैरियर और विशेष लाइटिंग व्यवस्था की गयी है. वन्यजीव इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की सलाह पर रात में जानवरों के लिए उपयुक्त लाइटें लगायी गयी हैं, और हाथियों के लिए अलग से मार्ग प्रदान किए गए हैं.
देहरादून के निकट लगभग 300 मीटर लंबी सुरंग को भी हाईवे का अहम हिस्सा बनाया गया है, जिसमें उत्तराखंड की सांस्कृतिक तस्वीरें और कलाकृतियां सजायी गयी हैं. यह सुरंग यात्रियों की यात्रा को मनोरंजक बनाती है और पर्यटन के आकर्षण को भी बढ़ाती है.
व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बल
विशेषज्ञों के अनुसार इस एक्सप्रेसवे से न केवल यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ेगी बल्कि व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को भी आक्रामक बढ़ावा मिलेगा. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों और व्यापारियों के लिए यह मार्ग उनके माल को बाजारों तक पहुंचाने में अधिक समय-कुशल रास्ता प्रदान करेगा. साथ ही देहरादून और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच में बहुत सहजता आएगी, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है.
दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल एक नई सड़क परियोजना है बल्कि यह उत्तर भारत की आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रगति का एक प्रमुख उदाहरण भी है.




