
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन एक निर्णायक चरण में पहुंच गया है। स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को फ्लोरिडा स्थित Kennedy Space Center के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B पर सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। शनिवार 17 जनवरी 2026 की शाम 6 बजकर 42 मिनट ईएसटी पर यह प्रक्रिया पूरी हुई। इसके साथ ही चंद्रमा की दिशा में पहले मानवयुक्त आर्टेमिस मिशन की औपचारिक उलटी गिनती शुरू मानी जा रही है। यह मिशन नासा की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत इंसानों को फिर से चंद्रमा तक भेजने और आगे चलकर मंगल ग्रह की मानव यात्रा की तैयारी की जा रही है।
करीब 12 घंटे चला रोलआउट, बेहद धीमी गति से तय हुई दूरी
स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को वाहन असेंबली भवन से लॉन्च पैड तक पहुंचाने की प्रक्रिया बेहद जटिल और समयसाध्य रही। इस पूरी यात्रा में लगभग 12 घंटे का समय लगा। नासा के क्रॉलर ट्रांसपोर्टर 2 ने इस विशाल रॉकेट को करीब चार मील लंबी दूरी तक पहुंचाया। इसकी अधिकतम गति महज 0.82 मील प्रति घंटा रही, ताकि रॉकेट और यान की संरचना पर किसी तरह का दबाव न पड़े। वाहन असेंबली भवन के हाई बे दरवाजों से बाहर निकलने के बाद रोलआउट को कुछ समय के लिए रोका गया, ताकि क्रू एक्सेस आर्म में जरूरी तकनीकी समायोजन किए जा सकें। यही संरचना लॉन्च के दिन अंतरिक्ष यात्रियों और क्लोजआउट टीम को ओरियन यान तक पहुंचने में मदद करती है।
अब वेट ड्रेस रिहर्सल पर फोकस, लॉन्च डे जैसा अभ्यास
लॉन्च पैड पर पहुंचने के बाद अब इंजीनियरों और तकनीशियनों का पूरा ध्यान वेट ड्रेस रिहर्सल की तैयारी पर है। यह परीक्षण वास्तविक लॉन्च से पहले सबसे अहम माना जाता है। इसमें रॉकेट में क्रायोजेनिक यानी अत्यधिक ठंडे ईंधन को भरा जाएगा, पूरी काउंटडाउन प्रक्रिया को चलाया जाएगा और फिर सुरक्षित तरीके से ईंधन को निकाला जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य लॉन्च डे की हर गतिविधि का सटीक अनुकरण करना है, ताकि किसी भी संभावित तकनीकी खामी को पहले ही पकड़ा जा सके। नासा ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर एक से अधिक वेट ड्रेस रिहर्सल भी किए जा सकते हैं। यदि परीक्षण के दौरान किसी अतिरिक्त जांच या मरम्मत की जरूरत महसूस हुई, तो रॉकेट और यान को दोबारा वाहन असेंबली भवन में भी ले जाया जा सकता है।
चार अंतरिक्ष यात्री, चंद्रमा की परिक्रमा और वापसी का लक्ष्य
आर्टेमिस II मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे। नासा के कमांडर Reid Wiseman, पायलट Victor Glover और मिशन स्पेशलिस्ट Christina Koch के साथ कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के मिशन स्पेशलिस्ट Jeremy Hansen इस उड़ान का हिस्सा रहेंगे। यह मिशन लगभग दस दिनों का होगा, जिसमें अंतरिक्ष यान चंद्रमा की परिक्रमा करेगा और फिर पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी करेगा। इस दौरान चालक दल ओरियन अंतरिक्ष यान की प्रणालियों, गहरे अंतरिक्ष में मानव मौजूदगी के प्रभाव और लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्रा से जुड़ी प्रक्रियाओं का परीक्षण करेगा।
चंद्रमा से मंगल तक की तैयारी का अहम पड़ाव
आर्टेमिस II को केवल एक टेस्ट फ्लाइट के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह भविष्य के मानव लैंडिंग मिशनों की नींव है। नासा का लक्ष्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना है, ताकि वहां से आगे मंगल ग्रह के लिए मिशन भेजने की तैयारी की जा सके। इस उड़ान से मिलने वाला डेटा भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशनों, सतह पर रहने की योजनाओं और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी रणनीतियों में इस्तेमाल किया जाएगा। नासा के अनुसार आर्टेमिस कार्यक्रम मानव अंतरिक्ष उड़ान के एक नए युग की शुरुआत है, जिसमें चंद्रमा को एक स्थायी वैज्ञानिक और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।




