
भारत में रोजमर्रा के लेनदेन में छोटे मूल्य के नोटों और सिक्कों की कमी लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और छोटे दुकानदारों के बीच अक्सर ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों की कमी के कारण लेनदेन प्रभावित होता है। इस समस्या को दूर करने के लिए अब बैंकिंग सेक्टर एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
हाल की जानकारी के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) छोटे मूल्य के नोट और सिक्के उपलब्ध कराने के लिए विशेष मशीनें लगाने की योजना पर काम कर रहा है। इन मशीनों को स्मॉल वैल्यू डिस्पेंसिंग मशीन (SVDM) कहा जा रहा है। इनका उद्देश्य लोगों को आसानी से छुट्टा पैसा उपलब्ध कराना है।
SBI द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, ये मशीनें ₹1, ₹2, ₹5 और ₹10 के सिक्के तथा ₹10, ₹20 और ₹50 के नोट निकाल सकेंगी। इसकी एक खास विशेषता यह है कि ये मशीनें पारंपरिक ATM से अलग होंगी और उपयोगकर्ता UPI आधारित QR कोड स्कैन करके पैसे निकाल सकेंगे।
इस योजना के तहत शुरुआती चरण में लगभग 60 मशीनें लगाने की उम्मीद है, जिन्हें बड़े शहरों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है।
सरकार और बैंकिंग सिस्टम भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, छोटे नोटों की कमी को दूर करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं और भविष्य में इन मशीनों को पूरे देश में बड़े स्तर पर लगाया जा सकता है।
इन मशीनों का एक और संभावित मॉडल “हाइब्रिड ATM” हो सकता है, जिसमें उपयोगकर्ता बड़े नोट जमा करके छोटे नोट और सिक्के निकाल सकेंगे। इससे खासकर उन लोगों को फायदा होगा जिन्हें रोजाना छुट्टे पैसे की जरूरत होती है।
कुल मिलाकर, SBI की यह पहल डिजिटल और फिजिकल कैश सिस्टम के बीच बेहतर संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में छुट्टे पैसे की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।




