
Hindustan Shipyard Limited: HSL देश के सबसे पुराने सरकारी शिपयार्डों में गिना जाता है। 1941 में स्थापित इस शिपयार्ड को 1952 में केंद्र सरकार के अधीन लाया गया था। क्षमता के लिहाज से यह कोचीन शिपयार्ड के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा शिपयार्ड है।
भारतीय नौसेना अब हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) को सिर्फ जहाज निर्माण करने वाले सार्वजनिक उपक्रम के तौर पर नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रही है। नौसेना के डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने HSL के दौरे के दौरान यह संकेत दिया कि आने
वाले वर्षों में शिपयार्ड की भूमिका सिर्फ नए युद्धपोत बनाने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि उनके पूरे जीवनचक्र के रखरखाव, अपग्रेड और आधुनिकीकरण तक बढ़ेगी।
वाइस एडमिरल सोबती ने 6 जुलाई को विशाखापत्तनम स्थित HSL का दौरा किया। इस दौरान हाल ही में नियुक्त चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) सी. रघुराम ने उन्हें शिपयार्ड में चल रही परियोजनाओं, आधारभूत ढांचे के आधुनिकीकरण और भविष्य की तैयारियों की जानकारी दी।
निरीक्षण के बाद सोबती ने HSL के हाल के बदलावों और उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना और HSL का रिश्ता दशकों पुराना है लेकिन अब समय आ गया है कि इसे नए स्तर पर ले जाया जाए। उनके मुताबिक नौसेना चाहती है कि HSL सिर्फ जहाज बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न करे बल्कि युद्धपोतों के पूरे सेवा काल में उनके रखरखाव, तकनीकी अपग्रेडेशन और मिड-लाइफ अपग्रेड जैसे कामों में भी प्रमुख भूमिका निभाए।
रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय नौसेना अगले कुछ वर्षों में अपने बेड़े का तेजी से विस्तार कर रही है। नए युद्धपोतों के साथ-साथ पहले से सेवा में मौजूद जहाजों के अपग्रेड और लाइफ साइकिल सपोर्ट की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में HSL जैसी सरकारी शिपयार्ड की जिम्मेदारियां पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं




